साल 1997 में रिलीज़ हुई फिल्म Ziddi ने सनी देओल के करियर को एक और ऊंचाई दी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म का किरदार सबसे पहले किसी और एक्टर को ऑफर किया गया था। सनी देओल को यह रोल तब मिला जब निर्देशक गुड्डू धनोआ एक एक्शन हीरो की तलाश में थे जो गुस्से और आक्रोश को पर्दे पर असली अंदाज़ में उतार सके। सनी देओल की घायल, घातक और जीत जैसी फिल्मों की सफलता को देखते हुए उन्हें सबसे उपयुक्त माना गया। सनी की आक्रामक अभिनय शैली ही उन्हें ‘ज़िद्दी’ के लिए परफेक्ट बनाती थी।
स्क्रिप्ट पर सनी देओल की सहमति
जब ज़िद्दी की स्क्रिप्ट सनी देओल को सुनाई गई, तो उन्होंने तुरंत फिल्म में दिलचस्पी दिखाई। उन्हें ‘देव’ नाम का यह किरदार बहुत पसंद आया जो सिस्टम से लड़ता है और समाज के लिए खड़ा होता है। सनी को यह बात बहुत प्रभावित करती है जब कोई किरदार गलत के खिलाफ जाता है। उन्होंने अपनी शर्तों के साथ फिल्म साइन की और स्क्रिप्ट में कुछ सुझाव भी दिए ताकि उनका किरदार और भी दमदार लगे। निर्देशक गुड्डू धनोआ पहले भी सनी के साथ काम कर चुके थे, इसलिए दोनों के बीच आपसी तालमेल अच्छा था।
शूटिंग के दौरान हुए कुछ दिलचस्प किस्से
फिल्म ज़िद्दी की शूटिंग के दौरान कई रोमांचक और दिलचस्प घटनाएं हुईं। बताया जाता है कि एक्शन सीन के दौरान सनी देओल ने कुछ स्टंट्स खुद किए थे, जिनमें उन्हें हल्की चोट भी लगी थी। फिर भी उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी। फिल्म के एक फेमस डायलॉग “जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते” को खुद सनी ने अपने अंदाज़ में बदला था, और ये लाइन फिल्म की पहचान बन गई। वहीं करिश्मा कपूर और सनी की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
फिल्म की ब्लॉकबस्टर सफलता
ज़िद्दी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया। फिल्म ने अपने शुरुआती सप्ताह में ही रिकॉर्डतोड़ कमाई की और साल 1997 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। सनी देओल के एक्शन और डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों को सिनेमाघरों की तरफ खींचा। फिल्म में संगीत भी हिट रहा, खासकर “मेरा दिल ले गई ओ काफिर चीन ले गई” और “मुंडा सताए मेरा” जैसे गाने आज भी लोकप्रिय हैं। फिल्म की सफलता ने साबित कर दिया कि सनी देओल एक्शन हीरो के तौर पर दर्शकों के दिलों में राज करते हैं।
ज़िद्दी के बाद सनी की फिल्मी पहचान और भी मजबूत हुई
ज़िद्दी के बाद सनी देओल की छवि एक गुस्सैल लेकिन न्यायप्रिय हीरो की और भी मजबूत हो गई। फिल्म ने उन्हें एक ऐसा चेहरा बना दिया जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है और अकेले पूरे सिस्टम से भिड़ जाता है। इस फिल्म की लोकप्रियता ने आने वाली फिल्मों के लिए भी रास्ता साफ कर दिया और सनी को और भी दमदार भूमिकाएं मिलने लगीं। आज भी जब बात सनी देओल की सबसे ताकतवर भूमिकाओं की होती है, तो ज़िद्दी का नाम सबसे ऊपर आता है।