फिल्म ‘Mashaal’ (1984) हिंदी सिनेमा की एक बेहतरीन ड्रामा फिल्म है जिसने दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। इस फिल्म में अनिल कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई, जो उनके करियर के शुरुआती दौर की एक महत्वपूर्ण भूमिका थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनिल कपूर को यह रोल कैसे मिला? आइए जानते हैं फिल्म ‘मशाल’ से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से और अनिल कपूर की इस फिल्म में एंट्री की कहानी।
अनिल कपूर का फिल्मी सफर और ‘मशाल’ का महत्व
‘मशाल’ अनिल कपूर की दूसरी प्रमुख फिल्म थी। इसके पहले वे ‘हम पाँच’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे, लेकिन ‘मशाल’ ने उन्हें बॉलीवुड में एक नए स्टार के रूप में स्थापित किया। इस फिल्म के निर्देशक और निर्माता ज्योतिरादित्य कृष्णमूर्ति थे, जिन्होंने अनिल की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें फिल्म में मौका दिया।
जब ‘मशाल’ की कहानी और स्क्रिप्ट बनी, तो टीम को एक युवा, ऊर्जा से भरपूर और भावनात्मक रूप से मजबूत अभिनेता की जरूरत थी। अनिल कपूर की परफॉर्मेंस, उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और एक्टिंग स्किल्स ने उन्हें इस भूमिका के लिए फिट कर दिया।
अनिल कपूर को रोल मिलने की कहानी
दरअसल, अनिल कपूर को ‘मशाल’ का रोल मिलने की कहानी दिलचस्प है। उस समय वे अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे और बड़े निर्देशक से काम पाने की इच्छा रखते थे। ज्योतिरादित्य कृष्णमूर्ति ने अनिल की प्रतिभा को नोटिस किया और उन्होंने अनिल को इस फिल्म के लिए कास्ट करने का फैसला किया।
अनिल कपूर ने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी और उसमें गहरी दिलचस्पी ली। उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया क्योंकि यह किरदार उनके लिए एक बड़ी सीख और अनुभव था। इस फिल्म के जरिए अनिल ने अपने अभिनय के कई रंग दिखाए और दर्शकों को प्रभावित किया।
फिल्म ‘मशाल’ की कहानी और अनिल कपूर का किरदार
फिल्म ‘मशाल’ की कहानी एक आदर्शवादी युवक की है जो भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। अनिल कपूर ने इस किरदार को बेहतरीन ढंग से निभाया। उनका रोल भावनात्मक और संघर्षपूर्ण था, जिसमें उन्होंने अपने अंदर की जज्बातों को पर्दे पर उतारा।
उनका किरदार एक आम आदमी का था जो अपनी जिंदगी में न्याय और सही रास्ता अपनाने की कोशिश करता है। इस भूमिका ने अनिल कपूर को एक संवेदनशील और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
फिल्म ‘मशाल’ के कुछ दिलचस्प किस्से
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मेघना कुलकर्णी का सहयोग: ‘मशाल’ की शूटिंग के दौरान मेघना कुलकर्णी ने अनिल कपूर को बहुत सपोर्ट किया। दोनों की कैमेस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा।
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रियल लोकेशंस पर शूटिंग: फिल्म की शूटिंग असली और ग्रामीण इलाकों में हुई थी, जिससे फिल्म में सच्चाई और यथार्थ की झलक मिली।
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संगीत की लोकप्रियता: फिल्म का संगीत भी काफी हिट हुआ, खासकर गाने ‘बूढ़ी दादी की गुड़िया’ और ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखी’।
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अनिल कपूर का बदलाव: इस फिल्म ने अनिल कपूर के अभिनय में एक नया मुकाम स्थापित किया, जिससे वे बाद में कई बड़ी फिल्मों का हिस्सा बने।

